अधिवक्ताओं ने की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर
केराकत, जौनपुर (संवाददाता, मनोज चौहान)।
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार को तहसील बार एसोसिएशन द्वारा तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर गहरा रोष व्यक्त किया गया। धरने का नेतृत्व तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुरेश राम एवं महामंत्री श्री हीरेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से किया।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर व उचित कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से छात्रों की समस्याओं का समाधान बल प्रयोग के बजाय संवाद एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से करने का आग्रह किया।
संवाद और संवेदनशीलता से निकले हल: सुरेश राम
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुरेश राम ने कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
बल प्रयोग किसी समस्या का समाधान नहीं: नमनाथ शर्मा
पूर्व अध्यक्ष श्री नमनाथ शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उनका न्यायसंगत समाधान किया जाना चाहिए। बल प्रयोग किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
संवैधानिक अधिकारों का हो सम्मान: अनिल सोनकर
इस अवसर पर अधिवक्ता अनिल सोनकर गांगुली ने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से सुना जाना चाहिए। शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसका सम्मान किया जाना बेहद जरूरी है।
धरने में यह रहे उपस्थित:
इस विरोध प्रदर्शन और धरने में मुख्य रूप से अधिवक्ता शारदा प्रसाद यादव, कुंवर बहादुर यादव, राजनारायण, दिनेश पांडेय, प्रवीण शर्मा, अमरीश यादव, रवीनाथ मिश्रा, विष्णु उपाध्याय, उदय राज कनौजिया, रितेश, संजय यादव एवं मनोज मिश्रा सहित बार एसोसिएशन के तमाम पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
अधिवक्ताओं ने की निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा पर दिया जोर











